2025 के दौरान, नियोक्ताओं द्वारा रिजर्व सैनिकों को बर्खास्त करने के लिए कुल 746 अनुरोध प्रस्तुत किए गए। इन अनुरोधों में से 143 को खारिज कर दिया गया, जबकि 197 अनुरोधों को वापस ले लिया गया। यह स्थिति विभिन्न कारणों से उत्पन्न हुई, जिसमें सैनिकों की कार्यक्षमता और अन्य पेशेवर जिम्मेदारियाँ शामिल थीं।
इन अनुरोधों के बीच, 71 मामलों का निपटारा समझौता समझौतों के माध्यम से किया गया। यह समझौते दोनों पक्षों के लिए सुविधाजनक साबित हुए और उन्होंने विवादों को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा, 10 मामलों में अन्य समाधान भी खोजे गए, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी पक्ष असंतुष्ट न रहे।
यह आंकड़े इस बात को दर्शाते हैं कि रिजर्व सैनिकों की बर्खास्तगी के मामलों में सावधानीपूर्वक विचार किया जाता है। नियोक्ताओं और सैनिकों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए यह प्रक्रिया आवश्यक है। इस प्रकार के मामलों में न्याय और पारदर्शिता बनाए रखना महत्वपूर्ण है, जिससे भविष्य में ऐसी परिस्थितियों का समाधान सहजता से हो सके।
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