प्रोफेसरों ने राष्ट्रीय लेख में AI डेटा सेंटर की भाषा को चुनौती दी

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शीर्षक: "प्रोफेसरों ने एआई डेटा सेंटर की भाषा को चुनौती देते हुए राष्ट्रीय लेख लिखा" देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े और ऊर्जा-गहन डेटा सेंटरों की स्थापना के चलते प्रोफेसरों के एक समूह ने एक राष्ट्रीय लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने इन सेंटरों की भाषा और उनकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाया है। यह लेख विशेषकर उन स्थानों पर ध्यान केंद्रित करता है, जहां इन डेटा सेंटरों की स्थापना की जा रही है, जिससे स्थानीय संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। लेख में प्रोफेसरों ने बताया है कि कैसे ये डेटा सेंटर स्थानीय पर्यावरण और संसाधनों पर गहरा प्रभाव डाल रहे हैं। ऊर्जा की बड़ी मात्रा में खपत और जल की आवश्यकता के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों की कमी हो रही है। इसके अलावा, लेख ने इस बात पर भी जोर दिया है कि इन सेंटरों की भाषा और तकनीकी जटिलताएं स्थानीय लोगों के लिए समझना कठिन हो सकता है, जिससे संवादहीनता की स्थिति उत्पन्न हो रही है। प्रोफेसरों का कहना है कि इन डेटा सेंटरों की भाषा को सरल और स्थानीय संदर्भ में अनुकूलित करने की आवश्यकता है। इससे न केवल स्थानीय समुदायों को इनकी कार्यप्रणाली को समझने में सहायता मिलेगी, बल्कि डेटा सेंटरों के प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा। लेख में यह भी सुझाव दिया गया है कि सरकार और तकनीकी कंपनियों को मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

Authored by Next24 Hindi