### कार्नी का भारत दौरा: विदेशी हस्तक्षेप पर प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के भारत दौरे ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ताओं के साथ-साथ विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों को जन्म दिया है। उनके इस दौरे का उद्देश्य भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना है, लेकिन कुछ आलोचकों का मानना है कि इससे विदेशी हस्तक्षेप का खतरा बढ़ सकता है। इस परिदृश्य में, कार्नी के बयान और उनकी नीतियों पर गहन जांच-पड़ताल हो रही है।
भारत में व्यापार वार्ताओं के दौरान प्रधानमंत्री कार्नी ने आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। हालांकि, विपक्षी दलों ने उनके इस कदम को संदेह की नजर से देखा है। आलोचकों का कहना है कि कार्नी की नीतियां विदेशी शक्तियों को देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का मौका दे सकती हैं। यह विवाद इस बात पर भी प्रकाश डालता है कि कैसे वैश्विक व्यापार संबंधों में संतुलन बनाए रखना अहम होता है।
इस बीच, भारत और प्रधानमंत्री कार्नी के बीच व्यापारिक समझौतों को लेकर बातचीत जारी है। दोनों देशों के बीच सहयोग को लेकर सकारात्मक संकेत भी मिल रहे हैं, लेकिन विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों ने इस यात्रा को विवादास्पद बना दिया है। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह यात्रा दोनों देशों के हित में है और इसका उद्देश्य केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
Authored by Next24 Hindi