प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई, लेकिन ईरान पर हमले और भारत के साथ व्यापार को लेकर प्रधानमंत्री ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। यह चुप्पी तब आई जब दुनियाभर में ईरान के हालिया हमले और भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
प्रधानमंत्री के इस मौन पर विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीतिक चुप्पी हो सकती है। भारत यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री कार्नी ने कई आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर भारतीय अधिकारियों से वार्ता की, लेकिन ईरान के हमले और भारत के साथ व्यापारिक संबंधों पर पूछे गए सवालों को नजरअंदाज कर दिया। इससे यह संकेत मिलता है कि इन मुद्दों पर सरकार की कोई स्पष्ट नीति नहीं है या वह इसे सार्वजनिक नहीं करना चाहती।
कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि प्रधानमंत्री की यह चुप्पी अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जटिल समीकरणों का हिस्सा हो सकती है। भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को सुधारने की दिशा में यह यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन ईरान के मुद्दे पर प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया का इंतजार अब भी जारी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भविष्य की नीतियों और निर्णयों के लिए सरकार को अभी और विचार-विमर्श की आवश्यकता है।
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